सोनम वांगचुक क्यों कर रहे है अनशन क्या है लद्दाख वासियो की मांग क्या है छठी अनुसूची / LADDAKH PROTEST / DEMANDS / SIXTH SCHEDULE / SAVE LADDAKH
सोनम वांगचुक पिछले 6 मार्च 2024 से केंद्र सरकार से खफा होकर अपना आंदोलन कर रहे है जिसमे वो लद्दाख की समस्याओ के लिए सरकार से लगातार मांग कर रहे है। जब लद्दाख को 5 अगस्त 2019 को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था तो उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया था और प्रधानमंत्री मोदी का तहे दिल से आभार भी प्रकट किया था। परन्तु आज आखिर ऐसे क्या परेशानी हो गयी जिससे वो मोदी सरकार से वादा खिलाफी का आरोप लगा रहे है और 21 दिन तक केवल नमक और पानी के दम पर अनशन करते रहे। आज इस ज्वलंत मुद्दे पर हम पूरी बात समझेंगे और जानेगे सोनम वांगचुक के बारे में भी।
कौन है सोनम वांगचुक क्या है आमिर खान से रिश्ता
लद्दाख की समस्या को जानने से पहले जानते है सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के बारे में। थ्री इडियट के रेंचो को कौन नहीं जानता आमिर खान की इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में रेंचो के किरदार को बहुत प्रसिद्धि मिली। बताया जाता है यह किरदार असल जिंदगी में लद्दाख के फेमस इंजीनियर जो अब सोशल एक्टिविस्ट है सोनम वांगचुक से प्रेरित था। सोनम वांगचुक आमिर खान से एक अवार्ड शो मै मिले थे जो कि CNN के द्वारा रखा गया था इस अवार्ड शो में उन्होंने आमिर खान की फिल्म तारे जमीन पर की काफी तारीफ की थी।

चलो ये तो बात हुई फ़िल्मी मगर सोनम जो नए नए अविष्कार असल जिंदगी में करते है वो देखने लायक है।
सोनम वांगचुक के आविष्कार
सोनम ने नए नए इनोवेशन से लद्दाख के निवासियों की काफी मदद की है वे अपने नए नए आविष्कारों से भारतीय सेना की भी मदद करते है। इन सब उपकरणों के खास बात ये होती है कि इन्हे पर्यावरण के अनुकूल मतलब इको फ्रेंडली बनाया गया है उनके द्वारा किये गए इनोवेशन इस प्रकार है
आइस स्तूप
लद्दाख एक ठंडा मरुस्थल है मरुस्थल उस जगह को कहते है जहा वर्षा काफी कम मात्रा में होती है। वर्षा कम होने से पानी की कमी बराबर यहाँ बनीं रहती है जिसके कारण लद्दाख के लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है इस समस्या को दूर करने के लिए वांगचुक ने स्तूप के आकार का आइस स्तूप बनाया जो बर्फ को एक शंकु के रूप में स्टोर कर के पानी को स्टोर करता है यह पानी यहाँ खेती और पेयजल के की समस्या को दूर करता है। यह कैसे काम करता है और क्या है इसके निर्माण का तरीका सोनम अपने यूट्यूब चैनल पर बता रहे है।
सेना को दिया अपने पैसो से सोलर एनर्जी से लेस टेंट
सेना के जवान लद्दाख की कपकपाती ठण्ड में लगातार सीमा की रक्षा करते है इस दौरान वे कपडे के बने टेंट में रहते है और गर्मी के लिए ईंधन का प्रयोग करते है। यह एक खर्चीली प्रर्किया तो है साथ ही इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँचता है। सोनम ने इसके लिए सोलर एनर्जी से लेस्स टेंट बनाये और इन्हे सेना को भेंट किये। इसकी पूरी प्रक्रिया के लिए वीडियो में देखे।
लद्दाख में 5G इंटरनेट सेवा के लिए पहाड़ो पर लगाए मेड इन इंडिया बैटरी एंड टावर (LIFI लेज़र 5G इंटरनेट तकनीक )
कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के इस ज़माने में हिमालय के पार स्थित लद्दाख में इंटरनेट सुविधा पहुंचना आसान नहीं कई जानी मानी कंपनियों ने वहा के ऊचे और ठन्डे पहाड़ो पर इंटरनेट सुविधा पहुंचने में असमर्थता जताई तो सोनम ने इन पहाड़ो को एक टावर की तरह उपयोग में लेकर उन पर ट्रांसमीटर और सोलर बैटरी लगाकर दुनिया भर के लोगो को सोचने पर मजबूर कर दिया और इन पहाड़ो को बाधा न समझकर अपना दोस्त बना लिया। देखिये वीडियो
एजुकेशन को अलग स्तर पर ले गए सोनम वांगचुक


आपको ये जानकर अचरज होगा एक समय पर केवल 5 प्रतिशत हाई स्कूल की परीक्षा लद्दाख के बच्चे पास कर पाते थे जिसका मुख्य कारन लैंग्वेज था सोनम ने ऑपरेशन न्यू होप चलाकर इस समस्या को दूर किया उन्होंने 1988 में स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ़ लद्दाख (SECMOL)के स्थापना की जिसके द्वारा उन्होंने पारम्परिक शिक्षा पद्दति से अलग प्रैक्टिकल एजुकेशन पर फोकस किया। थ्री इडियट में दिखाए गए स्कुल तो आपको याद ही होंगे जहा के बच्चे प्रैक्टिकल नॉलेज वाली पढ़ाई करते दिखे थे वैसे विद्यालय अगर आपको देखने है तो वो सच में लद्दाख में मौजूद है माइनस 30 डिग्री की ठंड से बचने के लिए इन स्कूलों को सोनम ने पूरी तरह से सोलर एनर्जी से लैस किया है इनका आर्किटैक भी इन्होने ही बनाया है। इस विद्यालय की खास बात यह थी कि बच्चे ही इस स्कूल को खुद ही चलाते है वो भी डेमोक्रेटिक तरीके से,जिससे उन्हें आत्मविश्वास मिलता है I
सोनम वांगचुक की पर्सनल लाइफ
तब के जम्मू एंड कश्मीर के लेह डिस्ट्रिक्ट में 1966 में सोनम वांगचुक का जन्म हुआ। शुरू के 9 साल तक सोनम की पढ़ाई उनकी माता जी के द्वारा घर में ही हुई , क्युकी लद्दाख में स्कूलों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी इसीलिए उन्हें श्रीनगर पढ़ने के लिए भेजा गया। मगर लद्दाख और श्रीनगर में भाषा का काफी अंतर होने से पढ़ाई में उन्हें मुश्किल होने लगी तो सबसे पहले उन्होंने किताबो को अपनी लोकल लैंग्वेज में अनुवाद कर के अपनी शिक्षा पूरी की।
श्रीनगर के NIT कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली।
तो अब समझते है कि ऐसा इंसान जो एक ठन्डे मरुस्थल में लोगो की जिंदगी को आसान बना रहा था आखिर उसे आंदोलन की क्या जरुरत पड़ गयी।
आंदोलन को मजबूर सोनम वांगचुक की क्या है मांगे
लद्दाख को 5 अगस्त 2019 को जम्मू एंड कश्मीर से अलग कर के केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में कहा था की लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में एक संरक्षित राज्य का दर्जा दिया जायेगा जो मांग अभी तक पूरी न होने के कारण लद्दाख वासियो में नाराजगी है। अनुसूची 6 में शामिल करने के अलावा और भी मांगे है जिनको बिंदुवार एक एक कर के हम समझते है
लद्दाख को अलग राज्य का दर्जा दिया दिया जाये इस समय लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश है जिसमे विधान सभा नहीं है लद्दाखवासियो की मांग है कि या तो पूर्ण राज्य का दर्जा मिले या फिर विधानसभा सहित केंद्र शासित प्रदेश हो जैसे दिल्ली और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशो में है वो इसलिए कि अपनी स्थानीय समस्याओ को रखने के लिए इनके पास कोई मंच नहीं है। केंद्र शासित प्रदेशो में प्रशासन लेफिटनेंट जनरल या गवर्नर के द्वारा चलाया जाता है ज्यादातर ये केंद्र सरकार के द्वारा नियुक्त होते है और स्थानीय समस्याओ को समझने में उन्हें भी समय लग जाता है। सोनम वांगचुक का कहना है कि स्थानीय प्रतिनिधि के आभाव में हम अपनी समस्याओ को कहा रखे।
लद्दाख को 6 अनुसूची में शामिल किया जाये
ये तो प्रमुख मांग है तो समझते है 6 अनुसूची के बारे में जब देश का संविधान लिखा गया तो जनजातीय क्षेत्रो (विशेषकर भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र )को समाज की मुख्य धारा में जोड़ने के लिए एक भाग बनाया गया जिसे भाग 10 कहते है (संविधान में कुल 22 भाग है ) । इस भाग में केवल एक आर्टिकल था जिसे आर्टिकल 244 कहते है । इस आर्टिकल के भी 2 भाग है पहला 244 (1 ) जिसे पांचवी अनुसूची भी कहा जाता है ; यह असम राज्य को छोड़कर समस्त भारत के जनजातियों क्षेत्रो के लिए था।
और दूसरा 244 (2 ) जिसमे उस समय केवल असम राज्य का जनजातिय क्षेत्र शामिल था इसको ही छठवीं अनुसूची कहा गया ।असम से टूटकर बने राज्य मेघालय ,मिजोरम और त्रिपुरा आज की तारिख में इस अनुसूची में शामिल है । इस अनुसूची के अनुसार इन राज्यों में जहा पर जनजातियों की जनसँख्या अधिक होगी उसे एक स्वायत्त जिले का रूप देकर लोकल लेवल पर प्रशासन का अधिकार मिल जाता था । और जहा पर डिस्ट्रिक्ट के बराबर एरिया न हो उसे अनुसूचित क्षेत्र (ट्राइबल रीजन ) का दर्जा दिया जायेगा यहाँ भी प्रबंधन का अधिकार लोकल लेवल पर मिल जाता है। मुख्यत इस स्वायत्त एरिया के संसाधनो पर स्थानीय प्रशासन का एकाधिकार रहता है जैसे जल जंगल पर्वतो इत्यादि पर कोई भी बाहरी व्यक्ति बिना स्थानीय अनुमति के यहाँ के संसाधनों का दोहन नहीं कर सकता है।


लद्दाख में लेह और कारगिल को संसद में अलग अलग अलग सीट दी जाये इस समय लद्दाख की तरफ से लोक सभा में केवल एक सांसद है और राजयसभा में शुन्य। आंदोलन की मांग है की यहाँ से कम से कम 2 सांसद होने चाहिए जो संसद में लद्दाख का प्रतिनिधित्व करे।
लद्दाख लोक सेवा आयोग का गठन किया जाये लद्दाख के युवाओ के लिए रोजगार के लिए लद्दाख लोक सेवा आयोग का गठन किया जाये ये चौथी मांग है वांगचुक का कहना है जम्मू एंड कश्मीर को जो की साथ में ही केंद्र शासित प्रदेश बना वह पर युवाओ को रोजगार के अवसर देने के लिए लोक सेवा आयोग का गठन किया गया है साथ ही देश के हर राज्य को ये सुविधा प्राप्त है तो लद्दाख को क्यों नहीं।


सरकार के साथ बातचीत फेल होने के बाद सोनम ने आमरण अनशन शुरू किया और जब तक मांगे पूरी नहीं होगी ये आंदोलन चलता रहेगा। काफी लोग सड़को पर भी उतरे। सरकार का कहना है कि छटवी अनुसूची में शामिल करने से विकास रुक जायेगा इसका विरोध करते हुए सोनम ने बताया कि छठवीं अनुसूची कही से भी विकास विरोधी नहीं है बल्कि उस में तो स्थानीय लोगो के साथ समन्यव करते हुए विकास किया जाता है। वे कहते है कि हम विकास के विरोधी नहीं है परन्तु जो विकास लोगो और पर्यावरण को साथ में लेकर न किया जाये उसका परिणाम खतरनाक होता है। पर्यावरणविदों का भी मानना है कि पहाड़ी इलाको में विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जाता है जिसका उदाहरण जोशीमठ का खिसकना , उत्तरकाशी की सुरंग का गिरना ,ग्लेशियर का पिघलना और भी अनेको उदाहरण है। खैर अभी लद्दाख में आंदोलन जारी है और लोगो के इस पर अपने अपने विचार है आप इस मुद्दे पर अपनी क्या राय रखते है हमें जरूर बताये।
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